बल्ब का आविष्कार किसने किया?

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आज हम इस पोस्ट में जानेंगे की Bulb Ka Avishkar Kisne Kiya? इस पोस्ट में हम बल्ब का आविष्कार किसने किया यह जानने के साथ दुसरे भी दिलचस्प बातें जानेंगे जो शायद आपको ना पता हो. यह सवाल आप से किसी भी कम्पटीशन एग्जाम में पूछ लिया जा सकता है. अपने जनरल नॉलेज के लिए आपको यह पता होना चाहिए की बल्ब का आविष्कार किसने किया. इससे पहले भी हम जनरल नॉलेज से जुड़े बहुत से बातें जान चुके है और भविष्य में हम आगे इसी तरह आपके जनरल नॉलेज को बेहतर करने के लिए पोस्ट लिखते रहेंगे. तो दोस्तों चलिए जानते है बल्ब का आविष्कार किसने किया पूरी जानकारी.

bulb ka avishkar

बल्ब हम सब की जरुरत है सोचो अगर बल्ब नहीं होता तो हम कैसे अँधेरे में देख पाते? बहुत से लोगो का जवाब होगा की मोमबत्ती और लालटेन से भी तो देख सकते है. मोमबत्ती और लालटेन की समस्या यह होती है की रोशनी उतनी नहीं हो पाती जितनी हमें चाहिए होती है. आस पास के वास्तु आप जरुर मोमबत्ती या लालटेन की मदद से देख सकते हो लेकिन अगर आप पुरे रूम में रोशनी चाहते हो तो वह मुश्किल होगा.

बल्ब आविष्कार के बाद से लगभग सब बदल गया लोगो को अंधेरे में देखने के लिए किसी मोमबत्ती या लालटेन की जरुरत नहीं पड़ती. अब लोग बिजली की मदद से पुरे घर में उजाला कर सकते है जिसमे आपको सब कुछ सपष्ट दिखाई देता है. इसमें आपको किसी तरह की झंझट नहीं उठानी पड़ती बस एक बल्ब की जरुरत पड़ती है जो मार्किट में काफी सस्ते दामों पर मिल जाता है. जिस व्यक्ति ने इतनी बड़ी खोज की है हमें उनका नाम जरुर पता होना चाहिए इसलिए आज हम इस पोस्ट में बल्ब आविष्कारक का नाम जानेंगे.

बल्ब का आविष्कार किसने किया?

बल्ब का आविष्कार थॉमस अल्वा एडिसन ने किया था. इस आविष्कार पर उन्होंने 1878 में काम शुरू किया था. हालाँकि थॉमस एडिसन पहले वैज्ञानिक नहीं थे जिनके दिमाग में यह विचार आया. थॉमस एडिसन से पहले भी लगभग 20 वैज्ञानिक लाइट बल्ब की खोज में लगे हुए थे. इनमे से एक वैज्ञानिक का नाम हंफ्री डेवी था जिन्होंने 1802 में सबसे पहले इलेक्ट्रिक बल्ब का आविष्कार किया. हंफ्री डेवी ने बिजली के साथ प्रयोग करके एक बैटरी तैयार किया. जब उन्होंने तार को बैटरी से जोड़ा साथ में कार्बन लगाया तो कार्बन रोशनी देने लगा इस तरह सबसे पहले इलेक्ट्रिक बल्ब की खोज हुई. उनके इस आविष्कार को Electric Arc Lamp का नाम दिया गया. लेकिन इस आविष्कार में दिक्कत यह थी की रोशनी ज्यादा देर नहीं होती और यह रोशनी इतनी ज्यादा थी की इसका सामान्य तरीके से इस्तेमाल करना मुश्किल था.

आगे भी इसी तरह कितने वैज्ञानिक आये जिन्होंने इलेक्ट्रिक बल्ब बनाने का प्रयास किया लेकिन कोई ऐसा डिजाईन नहीं बन पा रहे थे जो मार्किट में उतारा जा सके और लोग इसका इस्तेमाल कर पाए. कुछ दशक बाद 1840 में ब्रिटिश वैज्ञानिक वार्रन द ला रियू ने Coiled Platinum Filament को वैक्यूम ट्यूब में रखा और इसके माध्यम से बिजली प्रवाह पारित किया. इस प्रयोग का उद्देश्य था की प्लैटिनम का High Melting Point इसे उच्च तापमान पर नियंत्रण में रखेगा. जिससे की कक्ष में कुछ गैस मॉलिक्यूल होंगे जो प्लैटिनम से प्रतिक्रिया करेंगे और रोशनी पहले के मुकाबले ज्यादा देर तक टिकेगी. लेकिन इस प्रयोग की सबसे बड़ी दिक्कत थी की प्लैटिनम काफी महंगा होता है जिस वजह से प्रोडक्शन में भी काफी दिक्कत आएगी और कोई खरीदेगा भी नहीं.

इसके बाद 1850 में जोसफ स्वान नाम के वैज्ञानिक आये उन्होंने Carbonized Paper Filaments का गिलास बल्ब में इस्तेमाल करके इलेक्ट्रिक बल्ब तैयार किया लेकिन अच्छे वैक्यूम और इलेक्ट्रिसिटी कमी के कारण यह ज्यादा देर टिक नहीं पाता था. 1870 तक मार्किट में अच्छे वैक्यूम पंप आ चुके थे उसके बाद फिर से जोसफ स्वान ने अपना प्रयोग शुरू किया. 18 दिसंबर 1878 को उन्होंने कार्बन रोड की मदद से तैयार किया गया लैंप Newcastle Chemical Society मीटिंग में प्रदर्शित किया लेकिन कुछ मिनट बाद ज्यादा बिजली के इस्तेमाल से यह टूट गया. इसके बाद उन्होंने इसमें कुछ बदलाव करके 17 जनवरी 1879 को काम करता हुआ लैंप फिर से मीटिंग में प्रदर्शित किया. यह प्रयोग उन्होंने फिर से 700 से ज्यादा लोगो को 3 फरवरी 1879 के दिन Literary and Philosophical Society of Newcastle upon Tyne मीटिंग के दौरान दिखाया. इस लैंप में इस्तेमाल हुए कार्बन रोड का प्रतिरोध काफी कम था जिस वजह से लैंप तक बिजली पहुँचाने के लिए बड़े कंडक्टर की जरुरत पड़ती थी इसलिए यह सामान्य इस्तेमाल या फिर मार्किट में बेचने लायक नहीं था. इसके बाद उनका ध्यान Carbon Filament के सुधार पर गया जो उन्होंने Cotton की मदद से तैयार किया जिसका नाम Parchmentised Thread था. इस फिलामेंट का पेटेंट उन्होंने 27 नवंबर 1880 को हासिल किया. जिसके बाद से इंग्लैंड के बहुत से घरो में इन बल्ब का उपयोग होने लगा. जोसफ स्वान का पहला ऐसा घर है दुनिया में जिसने सबसे पहले बल्ब की रोशनी हासिल की. लेकिन अभी भी यह बल्ब उतना विश्वसनीय नहीं था जितना होना चाहिए साथ में काफी सुधार करने बाकि थे.

अब आते है थॉमस अल्वा एडिसन जिन्होंने 1878 में अपना प्रयोग शुरू किया. इलेक्ट्रिक बल्ब पर पहले ही काफी खोज हो चुके थे जिस वजह से इन्हें अपने प्रयोग में काफी मदद मिली. इन्हें पहले से पता था इलेक्ट्रिक बल्ब में क्या सुधार करना बाकि है. इस सुधार के लिए उन्होंने “Improvement In Electric Lights” नाम से 14 अक्टूबर 1878 को पेटेंट करवाया. उन्होंने काफी प्रयोग किये पहले कार्बन, फिर प्लैटिनम उसके बाद दुसरे धातुओं के साथ भी लेकिन बाद में उन्होंने वापस कार्बन फिलामेंट पर प्रयोग करना जारी रखा. इसी तरह 1000 से भी ज्यादा प्रयोग हुए अंत में उन्होंने पाया की कार्बोनेटेड बांस से बने फिलामेंट 1200 घंटे से भी ज्यादा समय तक टिक रहे थे. इसी प्रकार दुनिया का पहला बल्ब तैयार हुआ जो मार्किट में बेचा जा सकता था.

इन सब बातों को जानने के बाद यह साफ़ हो जाता है की सिर्फ थॉमस अल्वा एडिसन को बल्ब बनाने का श्रेय देना ठीक नहीं होगा. जब थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म भी नहीं हुआ था तब से बल्ब बनाने के लिए बहुत से वैज्ञानिक परिश्रम कर रहे थे. लेकिन फिर भी लोग थॉमस एडिसन को बल्ब का आविष्कारक इसलिए मानते है क्योंकि वही ऐसे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने बल्ब को टिकाऊ, सस्ता और एक अच्छे डिजाईन को बनाने में अपनी भूमिका दी.

Final Words:

तो दोस्तों आज हमने इस पोस्ट में जाना की Bulb Ka Avishkar Kisne Kiya? इस पोस्ट में हमने बल्ब का आविष्कार किसने किया यह जानने के अलावा कुछ ऐसी भी बातों को जाना जो शायद ही किसी को पता हो. एक बात जो आप सभी को यह पोस्ट पढ़ने के बाद पता चला होगा की सिर्फ थॉमस अल्वा एडिसन ही नहीं थे जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया. इस आविष्कार में दुसरे वैज्ञानिकों की भी उतनी ही भूमिका रही लेकिन यह हमें किताबों में नहीं पढ़ाया जाता. अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो शेयर जरुर करे.

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मेरा नाम हेमंत जोशी है. मैंने दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.टेक किया हुआ है. मुझे टेक्नोलॉजी और एजुकेशन क्षेत्र में काफी दिलचस्पी है. इसलिए इस वेबसाइट पर मैं लोगो को टेक्नोलॉजी तथा करियर से सम्बंधित जानकारी देता हूँ.

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