घड़ी का आविष्कार किसने किया?

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आज इस पोस्ट में हम जानेंगे की Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya? आप सभी जानते हो घड़ी हमारे जीवन में कितना महत्व रखता है उस हिसाब से हम सभी को पता होना चाहिए की घड़ी का आविष्कार किसने किया. यह सवाल आप से किसी भी एग्जाम, कम्पटीशन में पूछ लिया जा सकता है. अपने जनरल नॉलेज को मजबूत करने के लिए भी आपको पता होना चाहिए घड़ी का आविष्कार किसने किया. इस पोस्ट में हम आपको घड़ी आविष्कारक का नाम बताने के साथ घड़ी से जुड़े दुसरे महत्वपूर्ण तथ्य भी बताएँगे. तो दोस्तों चलिए जानते है घड़ी का आविष्कारक किसने किया पूरी जानकारी हिंदी में.

ghadi ka avishkar

घड़ी की जरुरत हर किसी को है बिना घड़ी के हम पता नहीं कर पाएंगे की कोनसा काम कब करना है. चाहे स्कूल, कॉलेज या फिर ऑफिस जाना हो हम समय का पता घड़ी से ही लगा पाते है. किसी शादी, इवेंट, पार्टी में तभी हम जाते है जिस समय हमें निमंत्रित किया जाता है. पूजा पाठ, हवन इन सभी की शुरुवात भी किसी ख़ास समय पर किया जाता है. इससे पता चलता है की समय हम सभी के जीवन में कितना जरुरी है. घड़ी की जरुरत तब भी थी जब इसका आविष्कार नहीं हुआ था और आज भी हम सभी को इसकी जरुरत है. जब घड़ी का आविष्कार नहीं हुआ था तो अलग तरीके से समय का पता लगाया जाता था. चलिए पोस्ट शुरू करते है और घड़ी के इतिहास हो अच्छे से समझते है.

घड़ी का आविष्कार किसने किया?

घड़ी का आविष्कार सबसे पहले प्राचीन मिश्र के लोगो द्वारा हुआ 1500 BC में हुआ था. इस घड़ी का नाम सौर घड़ी था. यह घड़ी सूरज रोशनी के कारण जो परछाई बनती उस हिसाब से समय का पता लगाती थी. लेकिन इस घड़ी की सबसे बड़ी कमी यह थी की समय विश्वसनीय बिलकुल नहीं था. क्योंकि धरती सूरज के चक्कर लगाती है उस हिसाब से मौसम में भी बदलाव आता है जिस कारण समय का ठीक पता नहीं लग पाता था. दूसरी समस्या यह थी की सौर घड़ी रात के समय काम नहीं करती क्योंकि उस समय सूरज की रोशनी मोजूद नहीं होती है. इस घड़ी को ठीक तरीके से स्थापित करने के लिए ऐसी जगह लगाना पड़ता जहा सूर्य के ठीक आकाश के बीच में होने पर परछाई बिल्कुल सीधी दिखे. जिस समय इस घड़ी का निर्माण हुआ उस समय कोई दूसरी घड़ी समय बताने के लिए नहीं थी जिस वजह से सौर घड़ी से लोगो को काफी मदद मिली.

इसके बाद आता है जल घड़ी नाम से ही पता चल रहा है की इस घड़ी का आधार जल है. इस घड़ी का आविष्कार किसने और कब किया इसका कोई पक्का सबूत नहीं है. लेकिन कुछ सबूत मिले है जिस हिसाब से यह 1500 BC जितनी पुरानी हो सकती है. इस घड़ी में पानी के बहाव को देखते हुए समय का पता लगाया जा सकता था. उदाहरन के लिए एक कटोरे में समय लिख दिया जाता और उस कटोरे में समय बीतने के साथ कुछ बूँद पानी के गिरते थे. फिर यह देखा जाता की कटोरे में कितना पानी भरा है उस हिसाब से समय का पता लगाया जाता था. यह तरीका सौर घड़ी से इसलिए ज्यादा बेहतर था क्योंकि इसमें हमें सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

आज जो हम घड़ी का इस्तेमाल करते है उसका आविष्कार जर्मन, नूर्नबर्ग के ताला बनाने वाले और घड़ीसाज़ पीटर हेनलेन द्वारा 1510 में हुआ था. यह घड़ी आकार में छोटी तथा इसे एक जगह से दुसरे जगह ले जाना आसान था. हालांकि आज जिस घड़ी का इस्तेमाल हम करते है उसमे समय के साथ उसमे काफी परिवर्तन किये गये है.

आजकल के मोबाइल में आपको पहले से ही समय बताने के लिए घड़ी मिलती है इसके अलावा आप इसमें अलार्म भी लगा सकते हो. लेकिन फिर भी लोग कलाई में पहने जाने वाली घड़ी लेते है कितने घड़ियों का दाम तो लाखों में होते है यह आजकल फैशन के रूप में पहना जाता है. आजकल तो टेक्नोलॉजी इतिनी एडवांस हो गयी है की हमें मार्किट में स्मार्ट वाच देखने को मिलते है. यह घड़ी इतनी आधुनिक होती है की आप इसे हाथ पर पहने हुए भी कॉल, इंटरनेट, जीपीएस, ब्लूटूथ, वाई-फाई, मोबाइल एप्प्स, विडियो आदि की सुविधा उठा सकते हो.

Final Words:

तो दोस्तों आज हमने इस पोस्ट में जाना की Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya? इस में आपको घड़ी आविष्कारक नाम के साथ कुछ ऐसे भी बातें बताई गयी जो शायद आपको ना पता हो. घड़ी के इतिहास को देखकर ऐसा प्रतीत होता है की इसके आविष्कार में कई लोगो ने योगदान दिया है इसलिए किसी एक व्यक्ति को श्रेय देना ठीक नहीं होगा. आजकल समय देखने के लिए बहुत से उपकरण मोजूद है लेकिन पहले काफी संघर्ष करना पड़ता उसके बाद भी ठीक समय ज्ञात करना मुश्किल था. अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो शेयर जरुर करे.

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