प्रोटोन की खोज किसने की? पूरी जानकारी

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आज हम इस पोस्ट में जानेंगे की Proton Ki Khoj Kisne Ki पूरी जानकारी. अगर आप जानना चाहते है प्रोटोन की खोज किसने की है तो इस पोस्ट को पढ़ते रहे. प्रोटोन से जुड़े सवाल आप से किसी भी एग्जाम में पूछ लिया जा सकता है इसलिए जरुरी है की आपके पास प्रोटोन की पूरी जानकारी हो. प्रोटोन इतने छोटे होते है की उन्हें साधारण आँखों से देखना असंभव है इसलिए लोग हैरत में है की प्रोटोन की खोज कैसे हुई और किसने की. तो आज आपके सभी प्रश्नों का उत्तर इस पोस्ट में मिल जायेगा. तो चलिए जानते है प्रोटोन की खोज किसने की.

proton ki khoj

जब परमाणु की खोज हुई उस समय इसे सबसे छोटा कण समझा जाता था. लेकिन बाद में परमाणु पर भी काफी रिसर्च हुए और पता चला की इसके अंदर इलेक्ट्रान, प्रोटोन, न्यूट्रॉन और नाभिक मोजूद होते है. आज हम प्रोटोन पर ही चर्चा करने वाले है की इसकी खोज किस वैज्ञानिक ने की. आपके जानकारी के लिए बताना चाहूँगा परमाणु के अंदर नाभिक होता है और नाभिक के अंदर प्रोटोन और न्यूट्रॉन. लेकिन इलेक्ट्रान नाभिक के बाहर होता है और आकार में प्रोटोन तथा न्यूट्रॉन दोनों से छोटा होता है.

प्रोटोन की खोज किसने की?

प्रोटॉन की खोज अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा 1919 में किया गया था.

अर्नेस्ट रदरफोर्ड का जन्म 30 अगस्त 1871 को न्यूजीलैंड में हुआ था. अपना ज्यादातर समय रासायनिक प्रयोगों में गुजारने वाले वैज्ञानिक माइकल फैराडे के बाद अगर किसी का नाम आता है तो वो अर्नेस्ट रदरफोर्ड ही है. भौतिक विज्ञान में उनकी रूचि तथा प्रयोग के कारण 1894 में रदरफोर्ड को प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी सर जे.जे.थॉमसन के साथ काम करने का मौका भी मिला, इस काम के लिए उन्हें बाद में छात्रवृत्ति भी मिली.

सन 1911 की बात है जब रदरफोर्ड ने अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग से प्रोटोन का पता लगाया था. इस प्रयोग में उन्होंने सोने से बनी 100 nm (100 नेनोमीटर) की पतली पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की. जब यह बौछार हुई तो तीन परिणाम देखने को मिले. इस परिणाम के फलस्वरूप प्रोटोन की खोज हुई तो चलिए सबसे पहले परिणाम और उनका अर्थ जानते है.

  1. ऐसा पाया गया की ज्यादातर अल्फा कण सोने की पन्नी (Gold Foil) से बिना मुड़े सीधे निकल गए. जिसका यह अर्थ निकलता है की परमाणु (Atom) का अधिकांश भाग रिक्त है. इस रिक्त भाग में कोई आवेश (Charge) मोजूद नहीं होता.
  2. कुछ अल्फा कण सोने की पन्नी से टकराकर बहुत छोटे कोणों पर मुड़ गये. जिससे यह साबित होता है की परमाणु (Atom) में बहुत कम +ve आवेश (Charge) है. इसका कारण यह था की अल्फा कण के पास पहले से +ve चार्ज मोजूद था अब अगर एक समान चार्ज टकराते है तो दूर भागते है. इसीलिए ऐसा माना गया की परमाणु में भी +ve आवेश है. इसी प्रकार प्रोटोन की खोज हुई थी.
  3. बहुत ही कम कण, लगभग 20000 में से 1 कण, 180 के कोण पर मुड़ गये. जिससे यह साबित होता है परमाणु के सभी धनावेशित भाग (Positive Charged Area) और द्रव्यमान (Mass), परमाणु (Atom) के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित है. जिसे नाभिक (Nucleus) का नाम दिया गया.
  4. इस प्रयोग से यह भी पता चलता है की नाभिक (Nucleus) का त्रिज्या (Radius) परमाणु के त्रिज्या से 105 गुना छोटा है.

इस प्रयोग की सबसे बड़ी कमी यह थी की रदरफोर्ड ने बताया इलेक्ट्रान नाभिक (Nucleus) के चक्कर लगता है. लेकिन रदरफोर्ड यह सिद्ध करने में असक्षम रहे की इलेक्ट्रान अनंत समय तक उर्जा कहां से लायेंगे? क्योंकि लगातार चक्कर लगाने से इलेक्ट्रान की ऊर्जा में कमी होगी और अंत में इलेक्ट्रान नाभिक में गिर जाएगा जिससे परमाणु (Atom) समाप्त हो जाएगा.

Final Words:

तो दोस्तों आज हमने जाना Proton Ki Khoj Kisne Ki पूरी जानकारी. इस पोस्ट में आपको प्रोटोन की खोज किसने की तथा प्रोटोन की खोज किस प्रकार हुई सभी बातों को विस्तार से बताया गया. इस तरह के सवाल विज्ञान से जुड़े परीक्षा में बहुत बार पूछे जाते हो इसलिए हमने पोस्ट को साधारण भाषा में समझाने का प्रयास किया. अब आपको पता चला होगा इतनी छोटी चीज की खोज के लिए कितनी मेहनत लगी होगी. अगर आपको हमारा पोस्ट पसंद आया हो तो शेयर जरुर करे.

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मेरा नाम हेमंत जोशी है. मैंने दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.टेक किया हुआ है. मुझे टेक्नोलॉजी और एजुकेशन क्षेत्र में काफी दिलचस्पी है. इसलिए इस वेबसाइट पर मैं लोगो को टेक्नोलॉजी तथा करियर से सम्बंधित जानकारी देता हूँ.

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